Tuesday, 8 December 2015

निगोशिएबल इन्स्ट्रूमेण्ट्स (संशोधन) विधेयक, 2015


निगोशिएबल इन्स्ट्रूमेण्ट्स (संशोधन) विधेयक, 2015 को लोकसभा द्वारा इसी वर्ष मानसून सत्र के दौरान पारित किया गया था। इस विधेयक को राज्यसभा द्वारा पारित किए जाने के बाद यह विधेयक भारतीय संसद द्वारा पूर्णतया पारित हो गया है।
इस विधेयक के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्णय को पलटा जा रहा है जिसमें कहा गया था कि चेक बाउंस होने के मामलों में मुकदमा वहीं दायर किया जा सकता है जहाँ चेक जारी करने वाला बैंक स्थित है। इस विधेयक ने यह व्यवस्था कर दी है कि ऐसे मामलों में मुकदमा वहाँ दर्ज किया जायेगा जहाँ चेक को भुगतान के लिए प्रस्तुत किया गया है। इस विधेयक ने यह प्रावधान भी किया है कि चेक बाउंस से सम्बन्धित मामले उन्हीं न्यायालयों में दायर किए जा सकेंगे जिनका अधिकार क्षेत्र चेक से भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति के बैंक पर है। माना जा रहा है कि निगोशिएबल इन्स्ट्रूमेण्ट्स (संशोधन) विधेयक, 2015 का प्रभाव चेक बाउंस से सम्बन्धित 18 लाख से अधिक लम्बित मामलों पर पड़ेगा।

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